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Dharm ,jaati aur log

खूब लगाओगे नारे  तुम
मेरे भारत  महान  के ,
कब  तक  रटके  चिल्लाओगे
जरा  मायने  भई समझो  तुम इसके  सम्मान  के /
तुम  वहाँ  मन्दिर  चाहोगे
तो तुम वहाँ  मस्जिद  बनवाओगे ,
इससे  पहले  मन  में शुद्धता  कर लेना  तुम
वरना कल  फिर  किसी  और  आसिफा  को  वहाँ ले जाओगे /
कभी आरक्षण  घटाने बढ़ाने  की  खातिर  लड़जाते  हो
तो कभी पिक्चर का  नाम  बदलने  के लिए  आक्रोश  में आते हो,
इंसानियत   छोड़  तुम कुछ यूँ  बंट जाते हो
कि किसी मासूम के इन्साफ के लिए, फॉरवर्ड मैसेजेस से  ज्यादा  कुछ नहीं कर पाते  हो/
हर  पीड़ित के पीछे धर्म  लगाते हो
हर अपराधी  के आगे  राजनीति  लाते हो ,
इंसानियत, इज्जत और दर्द  का कोई मज़हब  नहीं होता
हर बार  तुम  बस  यही  क्यों भूल जाते हो/
आज  तुम “वी वांट  जस्टिस”  चिल्लाओगे
कल  ट्रेंड  खत्म होने के बाद फिर चुप  हो जाओगे ,
उन्हें  इन्साफ मिले न  मिले तुमको क्या ?
एक  नई  घटना के बाद  फिर भीड़  के साथ  एक नई पोस्ट  करने  में लग जाओगे/
हिन्दू मुस्लिम  में बंट जाते  हो
तो कभी  सामान्य दलित  के लिए लड़ जाते हो ,
कभी  इंसान   बन आना  सामने  अन्याय  के
देखना, कैसे अपने  उन  धर्म जाति  लोगों द्वारा  ही तुम  घसीटे जाते हो/
तुम खुद को हिन्दू बतलाते हो
तुम खुद को मुसलमान बताते हो,
मगर अपनी तसल्ली के लिए भी एक बार अपने गिरेबान  में झाँक लेना
तुम तो बस खुद में एक इंसान रूपी  हैवान  छिपाते हो/
चलो  बात  निर्भया आसिफा की अब न करते हैं
तुमहारे धर्म की थोड़ी तारीफ़ करते हैं,
अच्छा हुआ हमारा धर्म अभी यहाँ तक नहीं पहुँचा
 की अगर  बॉर्डर पर कोई मुस्लिम शहीद हो जाए तो
हम यहाँ उस लड़ाई में बचे हुए हिन्दू सैनिक को निशाना नहीं बनाते हैं/
क्यों प्यार  मोहब्बत  पर इस जाति धर्म ने रोक लगाई
क्यों हिन्दू मुस्लिम नहीं हो सकते भाई-भाई ?
यूँ  तो जानी  दुश्मन हो तुम अपने ही देश के,
और फिर  कहते हो भारत में अभी तक तरक्की क्यों  नहीं आई /
कभी तुम इतने मासूम बन जाते हो
यूँ बहकावे में आ अपने ही देश को जलाते हो,
धर्म जाति क्या कम थी ऐ होशियारों
अब तो तुम राजनीति में भी बंट जाते हो/
इतने स्वार्थी हो तो थोड़े और स्वार्थी बन जाओ
जरा थोड़ा और धर्म जाति के लिए अपना प्रेम बढ़ाओ ,
कम से कम अपने धर्म वालों  की गरीबी ही मिटाओ
ज्यादा नहीं तो अपनी जाति की बेटियों को ही बचाओ /
ये धर्म जाति का पुराण तुम अब बंद करो
इंसान रूपी मुखोटा हटा
हकीक़त में इंसान बानो ,
खुद को यूँ ऊँच-नीच की श्रेणी में न लाओ
इंसान हो,इंसानियत का सम्मान करो /
फिर तुम जब मानव बनजाओगे
तो रटके चिल्लाना छोड़ मन में दोहराओगे ,
हाँ मेरा  भारत महान है
कोई जाती धर्म नहीं ,
भारतीय ही मेरी पहचान है

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