mobile coupons amazon offers today

offers shopclues coupon today

coupons flipkart mobile offer

coupons myntra sale

Home / Poetries / Hindi Poetries (page 2)

Hindi Poetries

Hindi Poetries

पापा… by Ananya Jain

पापा… आज भी मेरा मन करता है कि जब मैं रोऊ, आप मेरे पास आकर पूछो, “बिट्टो, क्या हूआ?” आज भी मेरा मन करता है, जब मम्मी मुझे मारे, तब आप मुझे बचालो। आज भी मेरा मन करता है कि जब मैं खाना छोड़ कर बैठ जाऊँ तब आप मेरी …

Read More »

“तलाश” by सुरभी आनंद

“तलाश”  दायरो के मकड़जाल में        फड़फड़ाता हुआ जीवातमा    हैं वजूद की तलाश      आखिर क्यों आया यहां            उफना रही इच्छाएँ            कुछ कर गुजरने को            टिमटिमाती हुई इस लौ मे            अपने रूप में जीने को            खुद के प्रयासों से मैनें            …

Read More »

तुमसे मिलने की कोशिश करू by हिमांशु वर्मा

तुमसे मिलने की कोशिश करू । तुमसे मिलने की कोशिश करू । अपना बनाने की साजिश करू।। जितना मैं पास आउ उतना तुम दूर जाते , दुनिया की भीड़ में तुम हमसे ही गुम हो जाते, ज़मी से उड़कर तुम बादल में  छुप जाते, कोयल की कुक मे तुम ही …

Read More »

कवितायें सुरभि पांडेय की कलम से . . .

मैं क्या करूँ ?  जिस दुःख का एहसास चार दिनों में तुझे ख़ोखला कर जाता है वो ग़म मैं हर रोज़ जीती हूँ जिस जुदाई से तुझे इतनी नफ़रत है वो दूरियां मुझे भी उतनी ही खलतीं हैं तू क्यों नहीं समझ पाता मेरी मजबूरियों को मैं भी जवाबदार हूँ …

Read More »

कविता प्रियंका सग्गू की कलम से . . .

जीवन में जीवन में चलते चलते बड़ी बार थक जाती हूं मै कभी कभी डगर पर टूट जाती हूं मै जैसे तैसे अपने हिस्से उठा कर जोड़ती हूं मगर फिर से उठ जाती हूं मै अपने सभी बिखरे सपने फिर से संजोती हूं मै जरूरी ये नही कि क्या पाती …

Read More »

कवितायें सावन शर्मा की कलम से . . .

कुछ तो लिखा है मेरी तक़दीर में तेरे लिए या तो तेरा होना या तेरे लिए रोना मुद्दतो बाद कोई राह मिली इश्क़ की, जिसकी मन्ज़िल है तू तेरे इतना करीब हो कर तेरे नहीं चाहता तुझसे दूर होना  खोजा करता हु राह में शायद कभी तुझसे हो मिलना पर …

Read More »

कवितायें अभिषेक व्यास की कलम से . . .

मेरे मज़हब की जंजीरें मेरे मज़हब की जंजीरें, मुझे कैदी बनाएं, मेरी आत्मा, मेरे तन को जैसे छोड़ जाए, मुझे मालूम ना था इस कदर और यूहं बटूंगा , मेरे मज़हब की मशाल मे , मैं यूहं जलूँगा। कोई पगड़ी, कोई बुरका , कोई जनेउ पहनें, मजहब के नाम पर …

Read More »

कविता अक्षय शेलार की कलम से . . .

हम जिन्हे गुनगुनाएँ ऐसे गाने कहा है हमें झूम उठाए ऐसे तराने कहा है हमें सीखने की चाहत हो भले जितनी पर हमें सिखा सके ऐसे सयाने कहा है हम तुमसे दूर होकर भले और पास आएँगे मगर तुमसे दूर जाने के बहाने कहा है हमें सुनने की चाहत हो …

Read More »

कवितायें अर्पित कुलश्रेष्ठ की कलम से . . .

यातनायें तेरे इश्क़ से बेहद इश्क़ किया मर मिटना तो बहुत आसान बात थी मैने तो अपनी रूह को तेरे लिए कुर्बान किया पर क्या सिला दिया तूने मेरी मोहबत का मुझे अपने दूसरे आशिक़ो के साथ इश्क़ की पथरीली सड़क पर लहूलुहान छोड़ दिया अरे! क्या फर्क रहा उनमे …

Read More »

कवितायें हिमांशु वर्मा की कलम से . . .

सोच रहा हु क्या लिखु, ये रात का सन्नाटा या दिल में उठा यादो का सैलाब लिखु। उस हसीन की खामोशी या उसका हाल ऐ दिल लिखु। उसकी मज़बूरी का हाल या उसके त्याग की कहानी लिखु। उस हसीन की बात करती आँखे या शरारत करते हुए लबो की दास्ता …

Read More »