mobile coupons amazon offers today

offers shopclues coupon today

coupons flipkart mobile offer

coupons myntra sale

Home / Short Stories / Hindi Short Story / “बाबा और दहेज”

“बाबा और दहेज”

वो चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी बस रोए जा रही थी अपने बाबा (पापा) के आगे। “प्लीज, बाबा मत करवाओ मेरी शादी, मुझे पढ़ना है” ऎसा कहते हुए उसके आसु रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।

तुम समज क्यो नहीं रही हो बेटा! मेरे पास नहीं है पैसे तुम्हें आगे पढ़ाने के लिए, और अब तुम इक्कीस बरस की हो गई हो समाज वाले रोज पूछते है मुझसे “के क्या हुआ कब तक बेटी को घर में बैठा के रखोगे”?

वो पूछने लगी तो “बाबा आपके पास मेरी शादी के लिए रुपए है” ?
बाबा ने कहा ‘हां’! वो सिर्फ तुम्हारी शादी के लिए रखे है तुम्हें दहेज भी तो देना है। कौन ब्याहेगा तुमसे बिना दहेज के. . . . . ?

उसको ये सुनकर अंदर तक धक्का लगा (ठेस पहुंची) के बाबा के पास दिखावटी चीज़ों के लिए सब कुछ है मगर मेरे लिए कुछ नहीं!!!
अब उसने शायद समाज द्वारा बनाए गए कड़े उसूलो (नियमों) से हार मान ली। अब वो बस अपना मासूम सा चेहरा लेकर अपने बाबा को निहार रही थी और सोच रही थी के “मेरे बाबा कब से मेरे पराए और समाज के अपने हो गए”?

©Heena Kewlani

Facebook link https://www.facebook.com/heena.kewlani.399

About admin

Leave a Reply

Connect with:



Your email address will not be published. Required fields are marked *