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पापा… by Ananya Jain

पापा…

आज भी मेरा मन करता है कि जब मैं रोऊ,

आप मेरे पास आकर पूछो, “बिट्टो, क्या हूआ?”

आज भी मेरा मन करता है, जब मम्मी मुझे मारे,

तब आप मुझे बचालो।

आज भी मेरा मन करता है कि जब मैं खाना छोड़ कर बैठ जाऊँ

तब आप मेरी हर जि़द पूरी करो ।

आज भी मेरा मन करता है कि हम कहीं घूमने जाऐं

तब मैं पूरा दिन आपके साथ इंतज़ार करूं आपसे कहने को, “पापा, एक फोटो”।

आज भी मेरा मन करता है कि जब मैं स्कूल के लिए लेट हो जाऊं,

तो आप गुस्सा हो जोओ और फिर आप ही मुझे स्कूल छोड़ कर आओ।

आज भी मेरा मन करता है

कि स्कूल की डायरी के वो ‘फार्दस सिगनेचर’ वाले कालम मे आपका साइन हो।

आज भी मेरा मन करता है कि आप खाना खाने बेठो और ज़ोर से आवाज़ लगोओ,
“बिट्टो, पानी” , “बिट्टो, खाना”, “बिट्टो, चम्मच”, “बिट्टो, अचार” ।

आज भी मेरा मन करता है कि जब मैं छिपीटोला से गुज़रूं तो सब बोले,

“अरे, ये तो अनिल भाई सहाब की बेटी है ना!”

आज भी मेरा मन करता है कि जब मैं आपका वाट्सएप कानटैक्ट खोलूँ

तो उसमे आपका मैसेज हो।

आज भी मेरा मन करता है कि,

“मेरी बिट्टो सबसे अच्छी है, लेकिन इसके आगे किसी की नहीं चलती”।

आज भी मेरा मन करता है ये सब करने का…
पर शायद अब पहले जैसा वक्त नहीं रहा…
शायद, भगवान जी मुझ से थोड़ै से गुस्सा हैं,

इसलिए मेरी गल्तियों की सज़ा आपको दी…

लेकिन पापा, ये मेरा वादा है आपसे…
मैं एक दिन ऐसा कर के दिखाऊंगी कि आपको गर्व होगा मुझ पर।

आपकी बिट्टो

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