mobile coupons amazon offers today

offers shopclues coupon today

coupons flipkart mobile offer

coupons myntra sale

Home / Poetries / Hindi Poetries / कवितायें हिमांशु वर्मा की कलम से . . .

कवितायें हिमांशु वर्मा की कलम से . . .

सोच रहा हु क्या लिखु,

ये रात का सन्नाटा या दिल में उठा यादो का सैलाब लिखु।

उस हसीन की खामोशी या उसका हाल ऐ दिल लिखु।

उसकी मज़बूरी का हाल या उसके त्याग की कहानी लिखु।

उस हसीन की बात करती आँखे या शरारत करते हुए लबो की दास्ता लिखु।

उस हसीन की तड़प या उसके संतोष की मिसाल लिखु।

फिर सोचता हूं क्या उसके हक़ में अपनी जिंदगानी लिखु।

या फिर उसकी उस एक ख़ुशी के लिए अपनी तमाम खुशियो का सौदा लिखु।

©हिमांशु वर्मा 

आखिरी सलाम

किसी दिन ये दुनिया छोड़ जाउंगा , तु ये ना सोचना कि मे लोट आउंगा ।

तुम्हारी ऑखो से कतरा कतरा बह जाउंगा , जाउंगा इतना दुर मे कि याद भी ना आउंगा ।

रुठना ना हमसे तुम उस समय कि मे तुम्हे मनाउंगा ॥

ये मान लेना तुम लोगो कि बात की मै तुमसे बहुत दुर हो जाउंगा ।

वहा से तुम्हे ना कोइ चिठ्ठी ना कोइ संदेश भेज पाउंगा ।

खुश रहुंगा यही सोच कर मै वहा कि तुम्हे देख तो पाउंगा ।

बस थोडा समय ओर फिर मै तुमसे जुदा हो जाउंगा ।

यहि गम रहेगा मेरे दिल मै कि तुम्हे अल्विदा ना कह पाउंगा ।

कहते हे वहा बहुत खुश रहते हे, पता नही तुमसे जुदा हो कर केसे वहा खुश हो पाउंग।

अल्विदा दोस्तो मै तुमसे दुर चला जाउंगा ॥

©हिमांशु वर्मा 

एक ऐसा जहां

चलो एक एसा जहां बनाते हे।

जहा हम धर्म , मजहब को छोडकर, इन्सनियत को अपनाते हे।

जहा बम , गोली, बारुद को छोडकर , सुंदरता दुनिया की और बडाते हे।

चलो हम एक एसा जहां बनाते हे।

गीता , कुरान, को पडकर हम एक दुसरे को, उन आयतो और दोहो का मतलब बताते हे।

नफरत के काँटो को कुचलकर, प्रेम रुपी फुलो को अपने मन में खिलाते हे।

चलो हम एक एसा जहां बनाते हे।

हम खुद को सच्चा मुस्लिम या कट्टर हिंदू कहने से अच्छा खुद को अच्छा इंसान बनाते हे।

सभी मिलकर उस नफरत को दफनाते हे।

ज्यादा कुछ नही कर सकते हम तो क्या हुआ दोस्तो,

 बस हम एक गुण इंसानियत को सिख जाते हे।

चलो हम एक एसा जहां बनाते हे॥

©हिमांशु वर्मा 

बदला स्वरूप

पहले तो तुम अँधेरे में भी मिलने आजाया करते थे,

अब तो तुम दिन के उजालो में भी डरते हो।

पहले तो तुम मेरी हर बात पर मुस्कुराया करते थे,

अब तो हसँने वाली बात पर भी आँसु बहाया करते हो।

पहले तो तुम बहुत वादे किया करते थे,

और अब तो हर बात से मुकरते हो।

पहले तो तुम मेरे साया हुआ करते थे,

अब तो तुम मेरे साये से भी दुर रहते हो।

©हिमांशु वर्मा 

फौजी की प्रेम कथा

सुनो यारो तुमको एक बात बताता हु।

एक फोजी के दिल की बात बताता हु।

उसके आँखों में बसे उसके प्यार की कहानी सुनाता हु।

उसी की जुबानी उसके साथ हुए एक किस्से को आपके बिच बताता हु।

जब आया बुलावा माँ का तो प्यार को करके वादा लोट आने का में जाता हु।

बचाकर अपनी माँ की लाज में वापस आता हु।

युद्ध के दोरान लगी एक गोली सिने में फिर भी मोंत से कहता हे की,

खत्म करने दे इन दुश्मनों को फिर में तेरे संग चलता हु।

विजय प्राप्त कर अपने वतन का झंडा लहराता हे।

प्यार को यादकर कर वो थोडा सा मुस्कुराता हे।

बहुत खून बह गया था उसका शरीर से कमजोरी से वो लडखडाता हे।

गिरकर जमीन पर वो अपने बेग से एक कागज और कलम उठाता हे।

ये जन्म कर दिया मेने अपनी माँ के नाम पर तुझे दिए वादे को पूरा करने के लिए चल में अभी सो जाता हु।

ले कर आऊंगा अगला जन्म तेरे लिए मेरे प्यार इतना लिखकर वो सिपाही खुश जाता हे।

अंतिम बार वो सिपाही अपना प्रेम पत्र इस तरह अपने प्यार तक पहुचाता हे।

©हिमांशु वर्मा 

भोर का मंजर

बेफिक्री वो बचपन की देखो तमाशा बन गई हैं,

इन खेल दिखाते बच्चो के अलावा सारी दुनिया जम गई है ।

मै भी तो दूर खड़ा हूँ उनसे , मेरी भी धड़कन बड़ गई है,

लाचारी खुद की और उनकी देख कर आँख मेरी भर गई है।

भौर में मंज़र सड़क का देख चेतना सी जग गई है,

मै उठा हु अब जाकर के और वो गुड़िया पेट भरने को घर से निकल गई है।

©हिमांशु वर्मा 

मैं और तुम

मैं एक रात हु तुम हो एक चन्द्रमा,

दोनो मिल जाये तो होगी फिर पूर्णिमा।

मैं एक लफ्ज़ हु तुम हो एक कल्पना ,

दोनों मिल जाये तो फिर बने रचना।

मैं एक जाम हु, तुम हो पूरा नशा,

दोनों मिल जाये तो मदहोश होगा जहां।

मैं एक रेत हु, तुम हो एक साँचा,

दोनो मिल जाये तो फिर बने वो खुदा।

मैं एक प्यास हु, तुम हो जल का कुआँ,

दोनों मिल जाये तो मिटेगी फिर तृष्णा ।

©हिमांशु वर्मा 

कलम

कलम चल आज कुछ ऐसा लिखे ,

शून्य करके खुद को इस संसार का सारांश लिखे,

युगों युगों से चल रहे पाखण्ड का संहार लिखे,

कोयल के गीतों का अनुवाद लिखे,

सब कुछ सहती पर कुछ ना कहती ,

उस माँ वसुंधरा का गुणगान लिखे ,

जो सबको हे सँभाले,

उस परमशक्ति का आव्हान लिखे ।

©हिमांशु वर्मा 

https://www.facebook.com/himanshu.verma.73594

About admin

Check Also

SHE by Nupur Saxena

SHE She wakes up at five in the morning. She does dusting, sweeping and mopping …

One comment

  1. शुरुआत की 4 कविताएं जो मेरे नाम से डाली गई है वो मेरी नही है
    हिमांशु वर्मा { हिम }

Leave a Reply

Connect with:



Your email address will not be published. Required fields are marked *