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इजाज़त by Jenitta Sabu

 

इजाज़त

 

किसी सफर में मुझे वो ठंडी बाहें मिल जाऐं,

जो मुझे ठूठ कर बिखरने की इजाज़त दे जाऐं।

काश किसी मोड पे मुझे वो नरम हाथ मिल जाऐं,

जो मुझे खुलके रोने की इजाज़त दे जाऐं।।

किसी डगर में मुझे वो मासूम आँखें मिल जाऐं,

जो मुझे मेरे गम में डूब जाने की इजाज़त दे जाऐं।

काश किसी चोराहा पर मुझे वो दर्द में तडपती नज़रें मिल जाऐं,

जो मुझे मेरा दर्द को ब्यान करने की इजाज़त दे जाऐं।।

किसी रोज़ मुझे वो प्यार भरी घटा मिल जाऐं,

जो मुझे पे हुए हर सितम को भूल जाने की इजाज़त दे जाऐं।

काश किसी सुबह मुझे वो चमकती रोश्नी मिल जाऐं

जो मुझे मेरे हर ज़ख्म पर मर्हम लगाने की इजाज़त दे जाऐं।।

किसी दोपहर मुझे वो सनसनाती धूप मिल जाऐं,

जो मुझे मेरे हर आँसू को सूखने की इजाज़त दे जाऐं।

काश किसी रात मुझे वो ठंडी चाँदनी मिल जाऐं,

जो मुझे मेरे हर हादसे को बुरा ख्वाब बनाने की इजाज़त दे जाऐं।।

किसी गर्मी मुझे वो मुसकराते होंठ मिल जाऐं,

जो मुझे मेरे हर डर को भगाने की इजाज़त दे जाऐं।

काश किसी बारिश में मुझे वो खिलखिलाता चेहरा मिल जाऐं,

जो मुझे मेरे अंदर की आग भूजाने की इजाज़त दे जाऐं।।

किसी सर्दी में मुझे वो ठंडी हवा मिल जाऐं,

जो मुझे मेरी हर चुबन को जड से मिटाने की इजाज़त दे जाऐं।

काश किसी मौसम मुझे वो सुकून भरी आवाज़ मिल जाऐं,

जो मुझे मेरी हर तकलीफ से चैन भरी राहत की इजाज़त दे जाऐं।।

 

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