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अनुराग Anuurag

About the Author

ज्योति तिवारी भारत के पुरुष अधिकार आन्दोलन की विशिष्ट व्यक्तित्व हैं। उन्होंने अपनी पढाई केंद्रीय विद्यालय से शुरू की, पंजाब यूनिवर्सिटी से हिंदी में औनर्स की डिग्री प्राप्त की। पंजाब यूनिवर्सिटी ने उनको वर्ष १९९५ में डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी गोल्ड प्रदान किया। वर्ष १९९७ में ही प्रेमचंद कहानी पुरुस्कार से भी सम्मानित किया गया। सन २००२ में उन्होंने आकाशवाणी लखनऊ में बतौर समाचार वाचक सह अनुवादक पद पर काम करना शुरू किया। साथ ही, भारतीय विद्या भवन से पत्रकरिता में डिप्लोमा भी किया। २०१२ में एक पारिवारिक त्रासदी से उनको पुरुषों के लिए आवाज़ उठाने की प्रेरणा मिली। उन्होंने इस मुहीम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। लगभग २५० MP MLA से मिलकर उनको कानून के दुरूपयोग के बारे में जागरूक किया। इस मुहीम के तहत उन्हें दो बार संसद में भी जाने का मौका मिला। मीडिया में उनके पहले के अनुभव को देखते हुए पुरुष संघठन ने उनको प्रवक्ता बनाया और उन्होंने कई टेलीविज़न चैनलों में पुरुषों का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने २०१३ से लेकर २०१७ तक पुरुष समुदाय केंद्र चलाया और हजारों प्रताड़ित पुरुषों की मदद की ताकि वे विषम परिस्थिति में भी सामान्य जीवन जी सकें। वे कई रिसर्च रिपोर्टों की सह लेखक भी रहीं हैं, जो भारत सरकार को भेजे गए। उन्होंने बहुत से अंतर्राष्ट्रीय रेडियो टॉक शो में भी भाग लिया जहाँ उन्होंने भारतीय पुरुष की पीड़ा को दुनिया तक पहुँचाया। वे सिटिज़न जर्नलिस्ट और ब्लॉगर होने के साथ-साथ एक माँ और पत्नी भी हैं, जिसको वे अति महत्वपूर्ण कार्य मानती हैं।*

 

About the Book

जीवन के कठिन संघर्षो से जीतकर वो बड़ा हुआ था और उसके सपने कोई बड़े नहीं थे। वो तो एक साधारण जीवन जीने वाला साधारण आदमी था, फिर अचानक वो अपराधी कैसे बन गया या बना दिया गया? ४९७अ ऐसी ही एक धारा है जो किसी भी साधारण आदमी और उसके परिवार को अपराधी बना सकती है। जो उसके साथ हुआ वो किसी के भी साथ कभी भी हो सकता है। दोष किसका है, किसका नहीं यह न्यायालय बताएगा मगर तब तक दोष पुरुष का रहेगा। और जब तक ये सिद्ध होगा दोष पुरुष का नहीं था तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो दोष साबित ना होने पर महिला को सज़ा दे इसलिए यह गोरखधंधा चलता रहेगा। वो साधारण सा लड़का आखिर अपराधी बना कैसे? क्या परिस्थियाँ थी? और अपराध आखिर था क्या?

 

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